आज इतनी दिनों बाद उनसे मुलाकात हुई...
थोड़ी ही सही मगर बात हुई....
एक बहुत लम्बे अंतराल के बाद में...
फिर आंखे चार हुई.....
वो हँसता हुआ चेहरा, आज और भी हसीं था...
वो आँखों की चमक, आज बहुत तेज थी...
वो अंदाज़-ए-बयां, कुछ और ही था...
वो फिजा में बयार, कुछ और ही थी...
वीरू-ए-मोहब्बत भी खुश थी बहुत...
आस जागी की वो शायद लौट आई है...
झूम उठा था मेरा मन ख़ुशी से...
नाच रहा था मै दिल से....
अचानक दिल का सपना टूटा...
उम्मीदों का बाँध टूटा....
जब कहा उसने की...
'कोई और' है इस हसीं की वजह..
'कोई और' है इस हसीं की वजह..
क्या करता वीरू-ए-तनहा....
टूट गया था अन्दर से...
खुश रहो तुम हमेशा..दिल से निकली दुआ...
निकल पड़ा वह से..ये सोचते हुए...
'कोई और' है इस हसीं की वजह..
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